FIRE EXTINGUISHER (फायर एक्स्टींग्युशर)- आग को उसकी प्राथमिक अवस्था में ही बुझाना अधिक कारगर होता है, जिसके लिए एक्स्टींग्युशर बहुत ही उपयोगी अग्निशमन उपकरण है। Extinguisher का प्रयोग आग की प्राथमिक अवस्था में, अग्निशमन कर्मचारियों के पहुंचने से पहले किया जाता है । यह हल्के और छोटे होते हैं तथा आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाए जा सकते हैं इनको पोर्टेबल या फर्स्ट एड फायर फाइटिंग अप्लायंसेज भी कहा जाता है।
Types of Media used in Fire Extinguishers-
Extinguishing Media-
Extinguisher के अंदर प्रयोग किए जाने वाले साधन एक्सटिंग्विशिंग मीडिया रासायनिक पदार्थ, पाउडर, तरल या गैस के रूप में हो सकते हैं।
Expelling Media-
जिन पदार्थो की सहायता से Extinguishing Media को प्रेशर से सिलिंडर से बाहर निकला जाता है उसे Expelling Media कहते है ।
फायर एक्स्टींग्युशर चार प्रकार के होते हैं-
- Water Type(पानी फेंकने वाले)
- Foam Type (फोम फेंकने वाले)
- Powder Type (पाउडर फेंकने वाले)
- C02 extinguisher
1. Water Type
Soda Acid Type Fire Extinguisher- इनका प्रयोग वर्तमान समय में नहीं किया जाता है।
Water CO2 Gas Cartridge Type Fire Extinguisher-
इसकी बॉडी मेटल शीट की बनी रहती है और इस अग्निशामक में 9 Ltr पानी भरा रहता है| इसके अन्दर सी ओ टू गैस कार्टीज रखकर उससे गैस को छोडकर पानी को दबाव द्वारा बाहर निकाला जाता है|
बनावट-
मेटल शीट का बेलनाकार कन्टेनर एक कैप, जिसमें स्प्रिंग लोडेड पंक्चरीग पिन, कार्टीज होल्डर तथा कार्टिज होल्डर के उपरी भाग को पोर्ट होल होते है । कन्टेनर के उपरी भाग में एक नोजल तथा नोजल के साथ अन्दर से लगी एक डिस्चार्ज टयुब कन्टेनर के नीचे तक लगी हुई होती है। सामान्यतः 60 से 80 ग्राम क्षमता का Co2 गैस कार्टीज इसमें इस्तेमाल होती है| कैप के उपर लगे Plunger को चलने से बचाने के लिए सेफ्टी क्लिप लगी होती
चलाने की विधी:-
एक्स्टींग्युशर को आग के नजदीक रखें । सेफ्टी क्लिप को हटायें तथा प्लंजर पर चोट करें । प्लंजर पर चोट करने से गैस कार्टीज की सील टूट कर गैस कन्टेनर के पानी पर दबाव डालेगी और पानी डिस्चार्ज टयुब से होते हुए नोजल से आग पर फेका जायेगा ।
दोबारा भरना –
एक्सटिंग्युशर की कैप खोलिये । गैस कार्टीज को होल्डर से खोलिये । Extinguisher को साफ पानी से अच्छी तरह धोकर । कंटेनर को दुवारा साफ पानी से Water Level तक भरें। गैस कार्टीज वजन कर कैप के होल्डर में लगाईये । पंक्चर पिन, स्प्रिंग, प्लंजर, कैप के वॉशर, वेंट होल, पोर्ट होल आदि चेक कर कैप लगा दीजिये।
टेस्ट करना-
हर तीन महिने में एक बार एक्सस्टिंग्यूशर को खोल कर मुख्य भाग तथा कैप के भाग और गैस कार्टीज का वजन चेक करें | साल में एक बार चलाकर देखे ।
लाभ-
- साधारण आग के लिये बहुत ही उपयोगी है।
- कम तापमान वाली जगहों पर भी एंटी फ्रीजिंग रसायन का उपयोग कर काम में लाया जा सकता है।
- चलाना आसान है।
- रखरखाव आसान है
- जल्दी से रिफिल किया जा सकता है।
हानि–
- गैस कम होने पर कार्टीज बदलना पडता है ।
- गैस भरने के लिए बाहर भेजना पड़ता है।
- Cartridge का वजन करने पर ही गैस की मात्रा का पता चलता है।
- चलाने के बाद पूरा खाली करना पडता है
Water Stored Pressure Type Fire Extinguisher (पानी फेंकने वाले स्टोर्ड प्रेशर टाइप अग्निशामक):
यह अपेक्षाकृत नए टाइप का Extinguisher है। अग्निशामक में पानी भरा रहता है और बची खाली जगह में हवा भरी रहती है। Extinguisher के ऊपर प्रेशर दिखाने के लिए प्रेशर गेज लगा रहता है, तथा गैस को मुक्त करने के लिए स्क्वीज ग्रिप लगा रहता है। इसमें सेफ्टी पिन लगा रहता है, और लीवर को नीचे दबाते हैं जिससे कि पानी डिस्चार्ज ट्यूब से होता हुआ बाहर निकल जाता है। इस एक्स्टींग्युशर से यह फायदा होता है कि अपनी इच्छानुसार बाहर निकाला जा सकता है।
2. Foam Extinguisher (फोम एक्सटिंग्युशर)
फोम एक्सटिंग्युशर दो तरह के होते है-
Chemical Foam Extinguisher- वर्तमान समय में प्रयोग नहीं किया जाता है।
Mechanical Foam Extinguisher-
यह एक्सटिंग्युशर दो प्रकार का होता है-
a. Stored Pressure Type Mechanical Foam Extinguisher-
इसमें इनर कंटेनर नहीं होता है। इसमें फोम, फोम कम्पाउन्ड तथा पानी से मिलकर बनता है। फोम कम्पाउन्ड या तो पानी के साथ घोल बनाकर पात्र में रखा जाता है, या अलग अलग रखा जाता है। ये स्टोर्ड प्रेसर टाइप के एक्सटिंग्युशर होते हैं।
टेस्टिंग-
स्टोर्ड प्रेशर :- साल में एक बार चलाकर टेस्ट करना चाहिए। इसे जाँच के लिए खोला नहीं जा सकता है। एक्सटिंग्युशर में दबाव का पता प्रेशर गेज देखकर लगाया जा सकता है।
b. Co2 Cartridge type Mechanical Foam Extinguisher-
इस एक्स्टींग्युशर के मुख्यतः तीन भाग होते है ।
आऊटर कन्टेनर-
यह स्टील शीट का बना होता है । इसके उपर कैप बिठाने हेतू चूडीयां होती है । कन्टेनर के उपर के भाग में डिस्चार्ज होज तथा मिनियेचर फोम ब्राच लगाने की व्यवस्था होती है तथा अन्दर के भाग मे इससे जुडा अन्दर तक एक डिस्चार्ज टयुब लगा होती है । आउटर कन्टेनर मे 8.5 लिटर पानी में 1/2 लीटर AFFF मिलाकर भर दिया जाता है ।
कैप असेम्बली-
यह पीतल की बनी होती है, इसके मध्य में एक स्ट्राईकर लगा होता है। उसके नीचे वाले भाग में पंक्चर पिन लगी होती है । उपर में सेफ्टी क्लीप लगा दी जाती है। कैप में तीन वेन्ट होल होते है |
गैस कार्टीज- कैप में, चूडीयों द्वारा (थ्रेड फिटिंग) Co2 गैस कार्टीज को कस दिया जाता है । कैप मे, एक्स्टींग्युशर चलाने पर गैस बाहर निकलने के लिये तीन पोर्ट होल बने होते है । गैस, सोल्युशन (घोल) पर दबाव डालती है तथा फोम को बाहर निकालने में मदद करती है।
प्रयोग-
फोम एक्सटिंग्युशर का प्रयोग मुख्यतः तरल पदार्थ की आग पर किया जाता है। प्रयोग करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि फोम का जेट तरल वस्तु पर नहीं गिरना चाहिए। जेट को बर्तन के दीवार पर मारना चाहिए जिससे कि फोम तरल पदार्थ की सतह पर फैल सके।
लाभ
- फोम जलने वाली वस्तु की सतह को ढक लेता है और ऑक्सीजन को उसकी सतह तक पहुँचने से रोकता है।
- फोम में कुचालक की तरह ताप को सहने के गुण हैं और यह आग को भड़कने से रोकता है।
- फोम पर हवा के झोंकों का असर नहीं होता है।
- फोम अधिकांश तरल वस्तुओं पर तैरता है इसलिए यह कई तरह के तरल वस्तुओं की आग बुझाने के लिए उपयुक्त है।
हानियाँ
- फोम कुछ तरल वस्तुओं पर के साथ घुलमिल जाता है और इन्हें अस्थिर बना देता है।
- प्रोटीन से बना फोम अल्कोहल की आग पर कारगर नहीं होता। ऐसी आग पर अल्कोहल अवरोधक फोम काम में लाया जाता है
- ड्राई पाउडर एक्सटिंग्युशर के साथ फोम प्रयोग करने पर फोम पाउडर के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण नष्ट हो जाता है ।
- रासायनिक एवं यांत्रिक फोम का एक दूसरे पर हानिकारक असर पड़ता है। इसलिए एक ही जगह पर दोनों तरह के Extinguisher नहीं रखने चाहिए।
3. Dry Chemical Powder Extinguisher (DCP)
DCP Extinguisher का प्रयोग धातु की आग, बिजली की आग तथा तरल पदार्थ की आग जिसकी सतह पतली हो किया जाता है।
यह Extinguisher वजन के हिसाब से अलग अलग होता है। आमतौर पर ये 1, 2, 5 व 10 किलो क्षमता के होते हैं। इस Extinguisher के अन्दर ड्राई केमिकल पाउडर प्रयोग किया जाता है।
ड्राई केमिकल पाउडर एक्सटिंग्युशर में ज्यादातर क्लास BC पाउडर उपयोग में लाये जाते है । क्लास बी सी पावडर ज्यादातर सोडियम बाय कार्बोनेट बेस पर बने होते है | इन एक्स्टींग्युशरों में क्लास ABC पाउडर का जो की मोनो अमोनियम फास्फेट बेस पर बने होते है, उपयोग भी किया जा रहा है ।
DCP Extinguisher दो प्रकार के होते है –
a. Co2 गैस कार्टीज टाईप
b. स्टोर्ड प्रेशर टाईप
a. Co2 Gas Cartridge Type DCP Extinguisher
आग बुझाने का तरीका-
- ऑक्सीजन को हटाता है ।
- पाउडर Chemical Chain Reaction को तोड़ता है
- तापमान कम करता है या ठंडा करता है।
- एक्सस्टिंग्यूशर को आग के नजदीक रखें
- सेफ्टी क्लीप को निकालिये ।
- एक हाथ मे कन्ट्रोल टाईप स्क्वीज ग्रीप नोजल पकडिये और दूसरे हाथ से प्लंजर पर चोट कर कार्टीज को पंचर करें ।
- स्क्वीज ग्रीप दबायें तथा नोजल को आग की ओर कर, जल्दी जल्दी स्वीपिंग मोशन में घुमायें ।
b. Stored Pressure type DCP Extinguisher
अग्निशामक मे DCP Powder भरा रहता है और बची खाली जगह में Pressure के लिए Nitrogen Gas भरी रहती है। Extinguisher के ऊपर प्रेशर गेज लगा रहता है, तथा Extinguisher को चलने के लिए स्क्वीज ग्रिप लगा रहता है। इसमें सेफ्टी पिन लगा रहता है | लीवर को नीचे दबाते हैं जिससे कि पाउडर डिस्चार्ज ट्यूब से होता हुआ बाहर निकल जाता है।
4. Carbon Dioxide Fire Extinguisher (CO2)
बनावट-
यह स्टील का बना, बगैर जोड (बिना जॉइंट) का वेलनाकार सिलेन्डर होता है इसमें तरल कार्बन डाय ऑक्साइड गैस भरी रहती है । सिलेंडर के उपर के भाग में एक वाल्व ग्रुप लग होता है, जिसमें एक्स्टीग्युशर को चलाने और बंद करने के लिये व्हील बाल्व लगा होता है । वाल्व ग्रुप से फ्लेक्सिबल हाई प्रेशर होज पाईप के साथ एक डिस्चार्ज हार्न लगा होता है | छोटी क्षमता के एक्स्टींग्युशरो मे बगैर हाय प्रेशर होज पाईप के वाल्व ग्रुप से ही डिस्चार्ज हार्न लगा होता है । एक Extinguisher के अंदर 55 Bar का प्रेशर होता है ।
डिस्चार्ज हार्न-
यह गैस के हाई प्रेशर को लो (कम) प्रेशर में बदलता है (गैस के फैलाव) एक्स्पेंशन का क्षेत्र बढ़ता है तथा Blow Torch के प्रभाव को रोकता है, जिससे आग नही भड़कती है ।
टेस्टिंग:
सी ओ टू एक्स्टींग्युशर को 3 महीने में एक बार वजन कर देखना चाहिये । अगर 10 % से अधिक गैस कम है, तो दुबारा भरने के लिये भेजना चाहिये । और एक्स्टींग्युशर का डिस्चार्ज होज, डिस्चार्ज हार्न, वाल्व इत्यादि चेक करना चाहिये ।
एक्स्टींग्युशर का हर पाँच साल बाद या रिफीलिंग के समय, हायड्रोलिक प्रेशर टेस्टींग, 235 किलो प्रति वर्ग सेंटीमीटर पर करना चाहिये ।
लाभ:
– क्लास बी सी की आग बुझाने के लिये बहुत ही उपयोगी है।
– यह बिजली का कुचालक होने से बिजली युक्त आग को बुझा सकता है
– यह तेजी से कार्य करता है ।
– जलने वाली वस्तुओं को खराब नहीं करता है और ना ही अपना कोई प्रभाव छोडता है ।
– जहाँ पहुँचा नही जा सकता या तंग से तंग जगह में भी यह गैस होने के कारण, पहुँचकर आग को बुझाता है।
Wet Chemical Extinguisher for Kitchen Fire
किचन में cooking oils, cooking grease and vegetable fats से होने वाली फायर को बुझाने के लिए Class K type Extinguisher का प्रयोग किया जाता है क्योकि किचन में होने वाली फायर का Auto ignition temp बहुत ही कम होता है इसलिए अधिक हीट की वजह से फोम की लेयर टूट जाती है और आग फिर से लग जाती है ।
Class K type Extinguisher में Wet Chemical भरा होता है जो आग पर चिकने फोम की परत बनता है ।
Extinguishers चलाते समय रखने वाली सावधानियां –
Extinguishers चलाते समय हवा की दिशा का ध्यान जरूर रखे। अगर बंद कमरे में चलना है तो ध्यान रखे की कोई उस कमरे में फंसा ना हो
Extinguisher को चलाने के बाद बाकि Extinguishers से अलग जमीं पर लिटा कर रख दे । और चलाये हुए Extinguisher को रिफिल करे या चेंज कर दे ।
अगर कार्ट्रिज टाइप Extinguisher है तो प्लंजर पर चोट करते समय अपने सिर को Extinguisher के ऊपर ना रखते हुए थोड़ा साइड में रखे ।
